श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड
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प्राचीन मूल गुफा और नई गुफा

पवित्रतम स्थल तक पहुंचने के रास्ते में एक छोटे से आंगन की तरह का उभरा हुआ ढांचा है जिसके दाईं ओर गुफा का मुंह है। यह मूल गुफा है जो पिण्डियों की तरफ जाती है। पुराने समय में यात्री पवित्रतम स्थल तक जाने के लिए इसी गुफा का उपयोग करते थे। आजकल यह गुफा वर्ष के अधिक समय तक बंद रखी जाती है क्योंकि यह गुफा बहुत तंग है। पवित्रतम स्थल तक पहुंचने में अकेले आदमी को भी इसे पार करने में कई मिनटों का समय लग जाता है।
इसलिए अधिक यात्रियों को दर्शन की सुविधा देने के लिए दो नई गुफाओं (टन्नलों) को उपयोग में लाया जाने लगा है। एक टन्नल प्रवेश के लिए प्रयुक्त होती है जो सीधे पवित्रतम स्थल तक ले जाती है। दूसरी टन्नल दर्शन करने के बाद बाहर निकलने के लिए प्रयुक्त होती है। प्राचीन मूल गुफा को कम भीड़ के दिनों में या परंपरागत त्यौहारों या अनुष्ठानिक अवसरों पर खोला जाता है। इस गुफा में से माता रानी का दर्शन करना एक बिलकुल अलग तरह का अनुभव होता है और इस दिव्य आशीर्वाद का आनंद लेने के लिए इच्छुक यात्रियों को सुझाव दिया जाता है कि वे अपनी यात्रा की योजना उन दिनों में बनाएं जिन दिनों भीड़ कम होती है।
जब यात्री वास्तविक गुफा का स्थल पार कर लेता है तो वह एक गलियारे में पहंुच जाता है, जिसकी छत पर अनेक घंटियां लटकती दिखती हैं। कुछ एक गज चलने के उपरांत यात्री एक खुले प्लेटफार्म तक पहुंचते हैं जहां माता के वाहन (सवारी) शेर की मूर्ति लगाई गई है और माता की सम्पूर्ण मूर्ति मंदिर में रखी गई है। यही टन्नल का प्रवेश है।

 
 

टन्नल में प्रवेश करने पर यात्री को चुप्प रहकर और सावधानी से पंक्ति में चलना चाहिए। टन्नल के अंत में संगमरमर के पत्थर का कुछ ऊंचा प्लेटफार्म है जिस पर दिव्य माता रानी ने अपने आपको प्राकृतिक शिला रूप ; जो पवित्र पिण्डियों के रूप में जानी जाती है में प्रकट किया हुआ है। यात्रियों को गुफा के भीतर और पिण्डियों के पास माता की प्रशंसा में लगाए जाने वाले जयकारों से परहेज करना चाहिए। इन जयकारों से उन यात्रियों का ध्यान भंग होता है जो दर्शनों के लिए तल्लीन होने में रूचि ले रहे होते हैं और पुजारियों द्वारा कहे जा रहे विवरण की ओर ध्यान दे रहे होते हैं।
मंच पर बैठा पुजारी पिण्डियों के विषय में यात्रियों को सूचनाएं देता है, दर्शन का समय सीमित होता है, यात्री पवित्र पिण्डियों की झलक मात्र ही देख पाता है कि पंक्ति को चलता रखने के लिए उसे आगे चलना पड़ता है। एक बार पुनः बता दें कि पवित्र गुफा में दर्शन माता की प्राकृतिक रूप से बनी पवित्र पिण्डियों के रूप में ही होते हैं। गुफा के भीतर कोई मूर्ति , चित्र या बुत आदि नहीं है। सारे पैदल रास्ते में और भवन में भी बहुत सारे चित्र हैं जो पवित्र गुफा में दर्शनों के स्वरूप के विषय में समझाते हैं। यात्रियों को इन चित्रों को ध्यानपूर्वक देखना चाहिए क्योंकि ये चित्र यात्रियों को पवित्र गुफा के भीतर दर्शन करने के बारे में समझाते हैं ।

दर्शनों के विवरण के लिए यहां दबाएं। Click Here

 
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